Shayri : Zindigi kii
1 . करने हम जमाने को पीछे निकले पता चला जमाना पीछे ही है बस हमे पहला कदम आगे बढ़ने को है 2 . Teri naraj gi bhi jayaj ha mera dost Ma khud sa bhi khus nahi hu aaj kal 3 . जिंदगी में जोखिम हर मोड पर हे जिस जिस्ने उठाली वो जिंदगी का खेल अपने तारिका से खेलता है और जिस्ने नहीं उठाई उसका साथ जिंदगी खेल खेलती है 4 . इच्छा कितनी बेवफा होती है ,पूरी होती ही बदल जाती है
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